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Description

कनकासव 

श्वास एवं कास की एक प्रशिद्ध आयुर्वेदिक दवा है | कफज विकार जैसे श्वांस, खांसी, अस्थमा, सीने में कफ जमना आदि में इस दवा का प्रयोग किया जाता है | आयुर्वेद में आसव – अरिष्ट कल्पना के तहत इस आयुर्वेदिक सिरप का निर्माण किया जाता है | कनकासव सिरप का मुख्य घटक “कनक” अर्थात धतुरा है , इसके साथ ही वासा, कंटकारी एवं मधुक आदि कुल 14 घटक द्रव्य पड़ते है |

दमा, टीबी, रक्तपित, जीर्णज्वर आदि रोगों में इसका आमयिक प्रयोग किया जाता है | वैसे अस्थमा एवं क्षय रोग की यह उत्तम दवा है | इसमें धतूरे एवं वासा आदि के गुण होने के कारण दमे जैसे रोग के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है |

कनकासव की खुराक या सेवन विधि 

इसका सेवन भोजन करने के पश्चात 12 से 24 मिली की मात्रा में करना चाहिए | सेवन करते समय बराबर मात्रा में गुनगुने जल का प्रयोग किया जाना चाहिए | रोग एवं रोगी की प्रकृति के आधार पर वैद्य इसकी खुराक निर्धारित करते है | अत: सेवन से पहले निपुण वैद्य से परामर्श लेना आवश्यक है

कनकासव के फायदे या स्वास्थ्य लाभ 

  • अस्थमा रोग में यह सर्वाधिक उपयोगी है |
  • खांसी एवं जमे हुए कफ में इसके सेवन से लाभ मिलता है |
  • टी.बी. रोग में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है |
  • यह छाती में जमे हुए कफ एवं संक्रमण को दूर करने में लाभदायक आयुर्वेदिक दवा है |
  • रक्तपित की समस्या में इसका आमयिक प्रयोग बताया गया है |
  • जीर्ण ज्वर एवं क्षतक्षीण में भी इसका सेवन बताया गया है |
  • पाचन को सुधारती है |
  • आमपाचन का कार्य करती है |

Additional information

Weight 0.500 kg
Quantity

250ml, 450ml, 680ml

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