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प्रदरान्तक रस गुण:-

गुण व उपयोग: प्रदरान्तक रस प्रदर रोग व मासिक धर्म को ठीक करने वाला एवं स्त्रियों के लिए लाभकारी है। इसमें कज्जली,, रजत भस्म, बंग भस्म, शंख भस्म व प्रवाल भस्म आदि घटक द्रव्य होने के कारण शिघ्र लाभ मिलता है। इसके सेवन से प्रदर रोग में उत्पन्न हुर्इ शिकायतें जैसे कमर में दर्द होना, हाथ-पैरों में तलवे और आँखों में जलन होना, मन्द-मन्द ज्वर रहना, भूख नही लगना आदि समस्त विकार मिट जाते हैं। इसके अतिरिक्त गर्भाशय सबल होकर गर्भधारण करने में पुन: समर्थ हो जाता है। इसके अलावा स्त्रियों का नये, पुराने, सफेद या लाल किसी भी प्रकार का प्रदी हो, नष्ट हो जाता है और दुर्बल रोगिणी स्त्रियों को यह रस सबल बना देता है। पुरूषों के लिए प्रमेह और स्त्रियों के लिए प्रदर, ये दोनों व्याधियाँ बहुत खतरनाक हैं। इस रोग की प्रकोपावस्था में शरीर कान्तिहन हो जाता है तथा खून की कमी होने से शरीर का रंग पीला हो जाता है। स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाना, किसी की बात अच्छी नही लगना, अग्निमांद्य, हाथ-पैर और आँखों में जलन, थोड़ा भ चलने पर हृदयकी गति बढ़ जाना, पेट में भारीपन, स्राव गर्भ और जलसदृश पतला होना। ये ऐसे दारूण रोग हैं कि जवानी में ही बुढ़ापा लाकर शरीर को जर्जर बना देते हैं। जीवित रहते हुए भी मनुष्य निर्जीव सा बन जाता है। उपरोक्त लक्षण होने पर प्रदरान्तक रस के सेवन से बहुत लाभ होता है। इसके साथ मधूकाद्यवलेह दूध के साथ देने से और भी विशेष लाभ मिलता है। इसके सेवन-काल में रक्त-प्रदर की व्याधी में अशोकारिष्ट का सेवन करना तथा श्वेतप्रदर में पत्रांगासव या चन्दनासव का भोजनोत्तर पानी में मिलाकर सेवन करने से शीघ्र एवं उत्तम लाभ मिकलता है।

मात्रा व अनुपान: 1 से 2 गोली, दिन में दो बार शहद अथवा रोगानुसार अनुपाने के साथ।

Additional information

Weight 0.250 kg

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