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आनन्दभैरव रस के चिकित्सीय उपयोग

आनन्दभैरव रस (कास), को खांसी cough, श्वास, अतिसार diarrhea, ग्रहणी, सन्निपात, अपस्मार epilepsy, कफ रोग diseases that occur due to vitiation of kapha, वात रोग diseases that occur due to vitiation of vata, प्रमेह, अजीर्ण indigestion, अग्निमांद्य digestive weakness, आदि रोगों में प्रयोग किया जाता है.
श्वास और कफ रोगों में इसका सेवन कफ को नष्ट करता है और उससे सम्बंधित लक्षणों में आराम देता है। इसमें शुद्ध बच्छनाग है जो की कफ को सुखाने में मदद करता है। जब जुखाम शुरू हो तब इसका सेवन न करे नहीं तो यह जुखाम को सुखा देगा जिससे सुखी खांसी तथा और तकलीफें हो जाएँगी।
शरीर में अधिक कफ के कारण होने वाले अतिसार में भी इसका सेवन लाभप्रद है। कफ अधिक होने से शरीर में पाचक पित्त कम हो जाता है। पाचक पित्त की कमी से पाचन धीमा हो जाता है और इससे मन्दाग्नि, भूख न लगना, अतिसार, जैसी स्तिथि उत्त्पन्न हो जाती है। ऐसे में आनन्दभैरव रस (कास) का प्रयोग करने से अतिसार बंद होता है तथा पाचन सुधरता है।
इस दवा का सेवन पित्त को उत्तेजित करता है। यह शरीर में पित्त को बढाता है। इसलिए जिन लोगों में पित्त अधिक बनता है उन्हें इस दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर करें भी तो सही अनुपान के साथ करें।

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Weight 0.250 kg

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