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रस माणिक्य के फायदे:-

1-वर्षाऋतु जन्य सर्दी (प्रतिश्याय) में रस माणिक्य के फायदे :

जब कोई व्यक्ति बारिश में भीग जाने से, शीत प्रकोप के प्रभाव से गले में कफ, श्वासनलिका और फेफड़ों में तकलीफ़, हल्का बुखार, सर्दी जुकाम से पीड़ित हो जाता है, उसे बार-बार छींकें आती हों, नाक पानी की तरह बहने लगे व आवाज और गला बैठ जाए तो 125 मिग्रा (1 रत्त) रसमाणिक्य और 500 मि.ग्रा. से 1 ग्राम
तक सितोपलादि चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम देने से तत्काल लाभ होता है। ( और पढ़े – खाँसी के घरेलू इलाज)

2-शीत प्रकोपजन्य जुकाम में रस माणिक्य के फायदे :

जब मौसम अत्यधिक ठण्डा हो जिसके प्रकोप से रोगी को छाती में जकड़ाहट हो तथा उस पर ध्यान न देने से फेफड़ों में कफ की घरघराहट बढ़ जावे, घबराहट, सिरदर्द, मलावरोध आदि लक्षण उत्पन्न हो जाएं तथा जुकाम के कारण श्वास लेने में परेशानी आने लगे तो ऐसी अवस्था में रसमाणिक्य 2 ग्राम, त्रिभुवन कीर्ति रस 2 ग्राम, पीपल का चूर्ण 5 ग्राम- इन तीनों को अच्छे से मिलाकर 10 पुड़िया बना लें।  1-1 पुड़िया सुबह-शाम शहद में मिलाकर देने से 2-3 दिन में ही लाभ हो जाता है। ऐसे समय में रोगी को मलावरोध न होने दें अतः मलावरोध होने पर तत्काल इसका निवारण करें।( और पढ़े – सर्दी जुकाम दूर करने के 15 सरल घरेलू उपचार )

3-इनफ्लूएंजा में रस माणिक्य के फायदे :

अनेक बार जुकाम के बाद वातश्लेष्मिक ज्वर (Influenza) की शुरूआत हो जाती है। इसकी प्रारम्भिक अवस्था में दूषित कफ फेफड़ों में जमा होकर रक्त में प्रवाहित होने लगता है। थोड़े से परिश्रम में ही रोगी की श्वास फूलने लगती है और घबराहट होने लगती है। गले में आये हुए कफ को बाहर निकालने में रोगी को कठिनाई व तकलीफ महसूस होती है। ऐसी अवस्था में रसमाणिक्य 1 ग्राम, कफ कुठार रस ढाई ग्राम, गिलोय सत्व 5 ग्राम- सबको मिलाकर पीस कर आठ मात्रा बना लें। एक-एक मात्रा सुबह- शाम अडूसे के पत्ते के रस या हर्बल वसाका के साथ देने से तुरन्त लाभ होता है।

4-जीर्ण ज्वर में रस माणिक्य के फायदे :

जब किसी रोगी को, दूषित अन्न का सेवन करने से, बार-बार थोड़ेथोड़े समय अन्तराल से बुखार आने की समस्या होजाती है तब ऐसे रोगी को शुद्ध सात्विक भोजन देते हुए ये औषधियां देने से लाभ होता है- रसमाणिक्य 5 ग्राम, पिप्पली चूर्ण 10 ग्राम, गिलोय सत्व 10 ग्राम- सबको अच्छे से मिलाकर बराबर मात्रा की 30 पुड़ियां बना लें तथा 1-1 पुड़िया सुबह-शाम शहद के साथ दें।( और पढ़े – जीर्ण ज्वर का सरल घरेलू उपाय)

5-कफप्रधान ज्वर में रस माणिक्य के फायदे :

कंठ से कफ की घरघराहट आती हो, 100 से 102°f बुखार, मुंह का स्वाद मीठा या चिकनापन लिये हुए हो, शरीर में आलस्य, जुकाम, हाथ-पैर में खिंचाव, बार-बार पेशाब होना, पेशाब का रंग सफ़ेद होना, आंखों में भारीपन, भूख की कमी आदि कफ प्रधान लक्षणों से युक्त रोगी को रसमाणिक्य 5 ग्राम और संजीवनी वटी 5 ग्राम मिलाकर खरल में बारीक पीसकर तथा बराबर मात्रा की 30 पुड़िया बना, 1 पुड़िया आधा चम्मच अदरक के रस और एक चम्मच शहद में मिलाकर देने से शीघ्र लाभ होता है।

6-न्यूमोनिया (फुफ्फुसीय सन्नीपात) में रस माणिक्य के फायदे :

न्यूमोकॉक्स बेक्टेरिया से होने वाले इस रोग में रोगी बहुत अशक्त हो जाता है, श्वास लेने में परेशानी के साथ-साथ श्वासगति तीव्र होकर फेफड़े धोंकनी की तरह तेज़ चलने लगते हैं। फेफड़ों से कफ सरलता से बाहर नहीं निकलता। ऐसे में सितोपलादि चूर्ण 10 ग्राम, गोदन्ती भस्म 5 ग्राम, अभ्रक भस्म 5 ग्राम, श्रृंगभस्म 5 ग्राम, रसमाणिक्य 5 ग्राम तथा पीपल चूर्ण 5 ग्राम- सबको मिला कर महीन पीस कर समान मात्रा की 30 पुड़ियां बना लें। 1-1 पुड़िया सुबह-शाम शहद व अदरक के रस के साथ देने से लाभ होता है। बच्चों में उम्र के आधार पर यह मात्रा आधी या एक चौथाई की जाती है। अडूसे का रस भी साथ में देना चाहिए।

7-वातरक्त में रस माणिक्य के फायदे :

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसे गाउट (Gout) कहा जाता है। यह रोग पैर के अंगूठों में वेदना से शुरू होता है और धीरे -धीरे बड़ी सन्धियों में शोथ और वेदना उत्पन्न कर देता है। कुछ रोगियों में सूखी खुजली, फोड़े फुन्सियां आदि त्वचा विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं। ऐसे में वातरक्त की चिकित्सा में दी जाने वाली औषधियों के साथ रसमाणिक्य मिलाकर देने से शीघ्र लाभ होता है।

8-सफ़ेद दाग में रस माणिक्य के फायदे :

श्वित्र रोग या सफ़ेद दाग़ की प्रारम्भिक अवस्था में रसमाणिक्य का चूर्ण व बाकुची चूर्ण को मिलाकर गोमूत्र में मिलाकर मोटी धूपबत्ती की तरह लम्बी गोलवर्ती बना कर सुखा ली जाती है। इस वर्ती दंडिका को जब भी उपयोग में लेना हो तो उसे पुनः गोमूत्र में चन्दन की लकड़ी की तरह पत्थर पर घिस कर सफ़ेद दाग के स्थान पर लेप करने से वहां

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Weight 0.250 kg

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