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Description

मण्डूर भस्म के फायदे

यह खून की कमी और इसके कारण हुए दोषों को दूर करती है।
यह सौम्य, काषाय और स्वभाव में ठंडक देने वाली औषधि है।
सौम्य होने के कारण इसे गर्भावस्था, बच्चों और कोमल प्रकृति के लोगों द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
शीतल होने से यह पित्त के विकारों में भी लाभप्रद है।
यह यकृत पर विशेष प्रभाव डालती है।
यह यकृत-प्लीहा वृद्धि को दूर करती है।
शरीर में किसी भी कारण होने वाली सूजन की यह बहुत अच्छी दवा है।
यह पेट रोगों को भी दूर करती है।
इसके सेवन से शरीर को बल मिलता है।
यह पाचन की कमजोरी, कामला, बवासीर, शरीर की सूजन, रक्त विकार, आदि रोगों में तुरंत ही लाभ करती है।
इसके सेवन से भूख लगती है, कमजोरी जाती और पूरे शरीर का पीलापन, सूजन दूर होते है।

मण्डूर भस्म के चिकित्सीय उपयोग

प्लीहा वृद्धि (Splenomegaly)
यकृत वृद्धि Yakritvriddhi (Enlargement of liver (Hepatomegaly)),
उदर शूल, मन्दाग्नि, संग्रहणी, खून की कमी
कमाला Kamala (Jaundice)
पांडु Pandu (Anaemia)
शोथ Shotha (Inflammation)
रक्त क्षय Raktakshaya (Blood loss)

मण्डूर भस्म की सेवन विधि और मात्रा

250 mg से 500 mg दिन में दो बार, सुबह और शाम लें। इसे रोग के अनुसार, एक से डेढ़ ग्राम तक भी दिया जा सकता है।
मंडूर भस्म को त्रिकटु चूर्ण + शहद के साथ लिया जाता है।
यदि कब्ज़ हो जाती हो तो इसे गोमूत्र के साथ लेना चाहिए।
बच्चों को इसे शहद के साथ दें।
इसे भोजन करने के बाद लें।
या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

Additional information

Weight 0.250 kg

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